बुधवार, 10 जनवरी 2018

विख्यात अम्बादेवी मंदिर आभूषण चोरी षडयंत्र के लिए RTI की यात्रा और बड़ा खुलासा

माँ अम्बादेवी शक्तिपीठ मे 7 दिसम्बर 2015 कों अज्ञात लोगों माता के गहनों की चोरी का झूठा षडयंत्र रचा था इसलिए माँ अम्बादेवी के मन्दिर पर सरकारी ट्रस्ट बनाने के लिए तथा आभूषण चोरो कों सजा दिलाने के लिए मेरे द्वारा की गई सी एम हेल्पलाइन एवं थाना कार्यालय मे शिकायतों के प्रमाणिक दस्तावेज , वही सुचना के अधिकार के तहत प्रमाणित दस्तावेज जो थाना कार्यालय से प्राप्त हुए 

आठनेर थाना कार्यालय सत्यापित आवेदक प्रतिलिपि
अम्बा चोरी मामले का खुलासा होने बाद थाना प्रभारी ने लिखा सरकारी ट्रस्ट बनाने का आवेदक SDM साहब कों



 धर्म प्रचार - प्रसार मंच द्वारा जिला कलेक्टर को सौपा ज्ञापन
जिसमे अम्बादेवी मन्दिर पर सरकारी ट्रस्ट बनाने की मांग की


रविन्द्र मानकर के प्रयासो से कार्यालय जनपद पंचायत आठनेर द्वारा सत्यापित आवेदक सार्वजनिक


 अनुविभागीय अधिकारी को जनपद द्वारा प्रेषित आवेदक पत्र


कार्यालय आठनेर थाने से सूचना कें अधिकार द्वारा चोरी प्रकरण का खुलासा


अम्बा माई चोरी प्रकरण को बन्द कर न्यायालय कें सामने खुद पैसो कें दबाव थाना प्रभारी ने प्रस्तुत किया


सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन पत्र

कार्यालय का नाम :- लोक सूचना अधिकारी कार्यालय जिला दंडाधिकारी कलेक्टर जिला बैतूल मध्यप्रदेश ।

चाही गई जानकारी का विवरण

1.बैतूल जिले के धार्मिक स्थलों मे प्रसिध्द अम्बा माई मंदिर धारूल मॆ वर्ष 2015 से आज दिनांक तक मंदिर मॆ हो रही विवादित घटनाओं , दान राशि के दुरुपयोग की शिकायतों , मंदिर के प्राचीन नियमों के उल्लंघन की जनहित याचिकाओं , प्राचीन आभूषणों के गबन आदि समस्त समस्याओं के सम्बन्ध मॆ जिला कलेक्टर को प्राप्त शिकायतकर्ताओ / फरियादियों तथा आरोपित व्यक्तियों  के नाम व पते तथा उनकी शिकायतों पर दोषियों / संदिग्धों / आरोपित व्यक्तियों के विरुध्द जिला दंडाधिकारी द्वारा की गई कार्यवाई की सम्पूर्ण जानकारी एवं सभी जनहित याचिकाओं / आवेदनों / शिकायतों की सत्यापित प्रतियां ।
2. अम्बा माई मंदिर धारूल की देखरेख एवं संरक्षण की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर / मध्यप्रदेश शासन या जनपद पंचायत के अधीनस्थ देने के सम्बन्ध मॆ वर्ष 2015 से आज दिनांक तक आये समस्त आवेदनो / ज्ञापनों / जनहित याचिकाओं पर जिला कलेक्टर द्वारा की गई समस्त वैधानिक जाँच पड़ताल की जानकारी व न्यायालय या मध्यप्रदेश शासन के समक्ष प्रस्तुत की गई अंतिम जाँच पड़ताल की रिपोर्ट समस्त सत्यापित प्रतिवेदनो की छायाप्रतिया ।
3. विख्यात अम्बा माई मंदिर धारूल की देखरेख आज दिनांक तक जनपद पंचायत आठनेर या कलेक्टर के अधीनस्थ ना सौपने का प्रमुख कारण जिसमे संविधान या कानून की धाराओं का ऊल्लेख रहे ।
4. अम्बा मंदिर धारूल मॆ सरकारी ट्रस्ट बनाने हेतु म.प्र.शासन के ही थाना प्रभारी द्वारा तहसीलदार व एस डी एम महोदय को आवेदक लिखा है जिस पर हुई पूर्ण जाँच पड़ताल की जानकारी व जाँच रिपोर्ट की सत्यापित प्रतियां ।
5. अम्बा माई की प्राइवेट समिति मध्यप्रदेश
शासन से पंजीकृत होने से जिला कलेक्टर के दिशा निर्देश का पालन नही कर सकती और मंदिर का हिसाब किताब भी उनके समक्ष प्रस्तुत नही कर सकती इन बात को ध्यान मॆ रखते हुये जिला दंडाधिकारी का व्यक्तिगत बयान की छायाप्रति ।
6. शिवसेना संगठन मध्यप्रदेश के शिव सैनिकों द्वारा दिनांक 15/03/2016 अम्बा मंदिर के सम्बन्ध मॆ दिये ज्ञापन की छायाप्रति व शिव सैनिकों ककी माँग पर लिये गये जिला कलेक्टर के फैसले की जानकारी की  सत्यापित प्रतियां ।
07. अम्बा मंदिर धारूल मॆ निरंतर विवादित घटनाओं को देखते हुये जिला कलेक्टर द्वारा जनहित ,समाज हित , राष्ट्रहित , संस्कृति व कला हित मॆ लिये गये निर्देश /आदेश व न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत जानकारी की सत्यापीत प्रतियां ।
08 धर्म प्रचार प्रसार मंच व रविन्द्र मानकर द्वारा अम्बा मंदिर की देखरेख व संरक्षण के सम्बन्ध मॆ दिये आवेदन / ज्ञापनों पर की गई समस्त वैधानिक कार्यवाई , जाँच पड़ताल की सत्यापित प्रतियां ।

नोट :- आवेदक राष्ट्रीय स्तर के धर्म रक्षा मंच का प्रमुख है व उसे यह जानकारी धार्मिक भावनाओ को आहत पहुँचाने व धर्म के नाम पर लूट मचा कर धर्म हानि कर रहे लोगो पर कानूनी कार्यवाही करने के लिये चाहिये इसलिये आवेदक को सत्यापित प्रतियां प्रधान की जाये । सूचना के अधिकार के तहत चाही गई जानकारी यदि कार्यालय मे नही है या सम्बन्धित नही है ऐसी स्थिति मे उस 6(3) के तहत आवेदन को उक्त जानकारी सम्बन्धित विभाग को पत्र अंतरित कर आवेदक को उपलब्ध करवाने का प्रावधान है ।
उक्त जानकारी आवेदक को समयावधि मे जानकारी उपलब्ध करवाने की कृपा करे । आवेदन द्वारा निवेदन किया गया है उसे समस्त जानकारी जनहित हेतु निःशुल्क प्रदान की जाये व आवश्यक होने पर आवेदक के दूरभाष नंबर पर भी सम्पर्क किया जावे ।


सूचना कें अधिकार कें तहत खुलासा होने पर अम्बा मन्दिर पर सरकारी ट्रस्ट गठित करने का ज्ञापन सौंपते धर्म प्रचार प्रसार मंच कें कार्यकर्ता













मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

माँ अम्बादेवी भवानी धारूल देवी की महिमा पर वर्ष 2015 मे तैयार " माई का डंका बाजे रे " एलबम की सफलता - निर्देशक रविन्द्र मानकर


माँ अम्बादेवी शक्तिपीठ धारूल जिला बैतूल मध्यप्रदेश 
माँ अम्बादेवी भवानी की कीर्ति जन जन पहुचाने कें लिए जनसहयोग से तैयार " माई का डंका बाजे रे " एलबम का निर्माण कार्य सम्पन्न हुआ । भजन एलबम कें गीतो की रचना गोविन्द बेनाम जबलपुरी और सुधाकर पंडागरे जी ने किया । 
अम्बा भवानी कें भजनों कों संगीत बबलू मेथूज जी ने दिया वही सभी भजनों कों जबलपुर की सुप्रसिद्ध भजन गायिका चांदनी बघेल जी ने गाया । 
 
 



































सतपुड़ा की महारानी की सम्पूर्ण दर्शन यात्रा

🙏माँ सतपुडा की महारानी अम्बादेवी 🙏
Jai mata di 
धारुड वाली मां अम्बादेवी जिसकी मेहरबानी से ब्रम्हाजी सृष्टी निर्माण ,विष्णु पालन एवं शंकर जी शंघार करने की शक्ति प्राप्त करते है ,उस धारुड वाली मां अम्बादेवी को बार बार नमस्कार है।
पौराणिक एवं ऐतिहासिक तथ्यो से भरपुर सबकी मुरादे पुरी करने वाली ,अपने अनन्य भक्तो को अमर करने वाली मांई अम्बादेवी आपकी सदा ही जय हो ।
सतपुडा के घने जंगलो मे बिराजी मां अम्बादेवी का ये मन्दिर हर आने वाले भक्त के मन को मोह लेता है।
कथा है जब भगवान शिव मां सती के शव को लेकर बम्हांड मे ताडंव नृत्य कर रहे थे उस वक्त इसी स्थान पर मां सती के देह की चुनरी गिरी थी ।इस लिए इसे चुनरी वाला दरबार भी कहा जाता है।
मध्यप्रदेश के बैतुल जिले मे धारुड ग्राम पंचायत मे अम्बा माई का मन्दिर परम पवित्र सतपुडा पर अपनी वैभवशाली सत्ता के साथ सुशोभित है।
माई सती के देह की चुनरी वाली ,चार भुजाओ , मन के दुख को हरने वाली ,सब की मुरादे पुरी करने वाली माई अम्बा को कोटी-कोटी प्रणाम है।
इस धरती पर मां अम्बे ही वो शक्ती है,जो हमारी झोली भरने के लिए ,हमारी मुरादे पुरी करने के लिए ,हमे खुद अपने दरबार पर बुलाती है।
इस स्थान की महिमा चारो युगो मे 3 गुणो के लोगो द्वारा गाया जाते रहा है ,और आगे भी गाया जाते रहेंगा।
कोई भी भाषा हो ,कोई भी बोली हो
दुनिया भर मे जो हम पहला शब्द बोलना सीखते है वो है मां ।
आज हमारी यात्रा मे हम
आपको मां से मिलाने चलते है ।
शेरोवाली माँ,
पहाड़ावाली माँ,
धारुडवाली माँ,
अम्बादेवी माँ,
कहते है आप लाख जतन कर लो
कितने भी दर्शन को लालायित हो लेकिन जब तक मां का बुलावा नही आ जाता आप अम्बादेवी नही आ सकते है।
मां अम्बादेवी की दर्शन यात्रा अखण्ड भारत के केन्द्र बिन्दु बैतुल जिले से आरम्भ होती है।
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी को जोडने वाले मध्य रेल्वे के बैतुल रेल्वे स्टेशन से अम्बादेवी शक्तिपीठ की दुरी लगभग 90 कि.मी. है ।
बैतुल जिला मुख्यालय से आगे बढ़ने पर मां अम्बादेवी की यात्रा मे प्रथम दर्शन मां सुर्यपुत्री ताप्ति का होता है।
मान्यता है कि जब प्रलय हुआ तो सारी सृष्टी के जीव ब्रम्हाजी मे विलीन हो गये।
जब उन्होने पुन: सृष्टी के निर्माण का ध्यान किया तो भगवान सुर्य वहा उपस्थित हो गये ,लेकिन ब्रम्हाजी की व्याकुलता से वे भी चिन्तित हो उठे।
अत: उन्होने अपनी पुत्री ताप्ती का ध्यान किया ।
सुर्यपुत्री ताप्ति उनके ताप से उत्पन्न होकर सारी दिशाओ एवं आकाश को अलौकित करते हुए पिता का संताप दुर करते हुए भुलोक पर प्रकट हुई ।
इस तरह सृष्टी निर्माण के समय प्रथम नदी के रुप मे ताप्ती का अवतरण हुआ ।
ऐसा भी कथा है कि भगवान
भगवान राम ने ताप्ती नदी के तट पर 12 ज्योतिर्लिंगो की स्थापना कर भगवान शिव का रुद्राभिषेक पुजा अर्चना की थी जिससे उनके पिताजी राजा दशरत को ब्रम्हत्या के पाप से मुक्ति मिल सके ।
इस तरह आदिगंगा मां ताप्ती के दर्शनो के बाद आगे चलने पर आठ मोहल्लो का नगर आठनेर पड़ता है ।
नगर के प्रवेश द्वार पर ताप्ति झिरी मिलती है ,जिसके बारे विशेष कथा प्रचलित है कि एक भक्त को मां ताप्ति ने यहां पर दर्शन दिये थे और इस झिरी मे समेशा सदा वास करने का प्रण किया था।
आगे चलने पर बाजार चौक मे स्थित दुर्गा मन्दिर मे मातारानी दर्शन से अलौकिक आनन्द कि प्राप्ति होती है।
यह मन्दिर आठनेर नगर के वासियो की सबसे बडी आस्था और विश्वास का केन्द्र है।
नगर से लगभग 5 कि.मी दुरी चलने पर वो प्राचिन गुप्तेश्वर शिवधाम है जहाँ भगवान शिव ने अपना पीछा कर रहे भस्मासुर नामक राक्षस को कुछ पल के लिए पीछे मुड़कर देखा था।
इस भगवान के इस मन्दिर के दर्शन के बाद पुन: शहर वापस आकर अम्बादेवी के दर्शन के लिए आगे बढ़ते है ।
मां अम्बादेवी जाने का रास्ता घोघरा जोड से हिरादेही होते हुए जाता है।
रास्ते मे अनेक घाट चढ़ाव आते है कई खतरनाक मोड भी आते है ,परन्तू भक्तो का ऐसा विश्वास है कि जंगल के बिच रास्ते आने वाले नहालदेव बाबा के दर्शन मात्र से सभी बाधाये दुर हो जाती है।
अब हम धारुड ग्राम मे प्रवेश करते है ,
जहाँ से अम्बादेवी दरबार की दुरी लगभग चार कि.मी रह जाती है ।
आगे चलने पर छोटी अम्बा मांई मन्दिर दिखाई देता है।यहाँ सभी भक्तगण आवक-जावक के साधन खडे करते है। क्युकि आगे का रास्ता पैदल ही तय करना पडता है ।अब भक्तगण छोटी अम्बा माँई के दर्शन करके आगे बढ़ते है।
यहाँ से स्वयं भु प्रकट हुई गुफा मे बैठी माँ अम्बा माँई के दरबार की दुरी 2 कि.मी रह जाती है ,जो घने जंगल से होकर जाना पड़ता है।
नजाने कैसी शक्ति है माँ के इस धाम मे,
जो हर क्षण अपनी ओर खीचती चली है।
मां के भक्तो को ना पैरो के छाले रोक पाते है।
न पर्वतो की ऊँचाईया
मन मे श्रध्दा और होठो पर जयकारे लिये
मां के चाहने वाले आस्था के पग पर चले जाते है।
इस तरह माँ अम्बादेवी के भक्तो का जत्या
🙏जय माता दी🙏

संकलन / सम्पादक /लेखक 
रविन्द्र मानकर ( अम्बा भक्त )