मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020

मां बगलामुखी अनुष्ठान


      *🙏🕉जय माँ बगलामुखी🕉🙏* 



आपका विश्वास जब ना दे साथ , जब शत्रु भय से जीवन हो जाये बेहाल , जब बचाव के सारे रास्ते बन्द हो जाये , 

जब कानूनी मामलो मे फंसकर रह जाये , तब एक देवी की कृपा से आप अपना जीवन सफल बना सकते है। पुरे ब्रम्हान्ड मे शक्तिशाली है वो देवी , 

 सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती । 

आज के दौर मे चाहे या ना चाहे कोई ना कोई किसी ना किसी की बुरी नजर का शिकार हो ही जाता है । चाहे आप नौकरी करते हो या बिजनेस करते हो आपकी कामयाबी के कारण आपके गुप्त शत्रु बन ही  जाते है । 

जीवन मे कई बार समस्याओ का सामना करना पड़ता है । कई बार कानूनी चक्करों मे इंसान ऐसा उलझकर रह जाता है की उससे निकालना मानो ना मुमकिन सा हो जाता है । 

आपकी हर परेशानी का ईलाज है माँ बगलामुखी की उपासना । कहते है शत्रुओं और विरोधियो को शान्त करने व कानूनी मामलो से छुटकारा पाने के लिए माँ बगलामुखी की उपासना अचूक होती है । तो कैसे करें माँ बगलामुखी की उपासना, बताने से पहले जानते है माँ बगलामुखी की महिमा क्या है ,कौन है ब्रम्हांड की महाशक्ति बगलामुखी माँ


 ज्योतिषाचार्या देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी माँ भगवती  बगलामुखी देवी जी की अपार कृपा एवं मैया जी की प्रेरणा से प्रेरित होकर श्री ब्रह्मास्त्र विद्या माँँ बगलामुखी देवी जी की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए बताती है की , एक समय सतयुग काल में भयंकर तूफान आने से संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया और अनेकों लोक संकट में पड़ गए  जिससे संसार की रक्षा करना असम्भव हो गया , उस समय संपूर्ण जीव,मनुष्य ,देवजन,भगवान विष्णु सहित अत्यंत चिंतित हुए तथा भगवान शिव की प्रेरणा व कृपा से भगवान विष्णु महान तपस्या करने लगे उस तपस्या के प्रभाव से महात्रिपुर सुन्‍दरी देवी अत्यंत संतुष्ट हुई।


*हरिद्रा* नाम के सरोवर को देखकर सौराष्ट्र कठियावाड़ में  देवी अत्यंत गहरे उस सरोवर में जल क्रीड़ा करने के लिए जिस समय प्रवृत्त हुईं l

उस समय श्री विद्या से तेज उत्पन्न अपूर्व के चारों ओर फैल गया उसी समय आकाश में तारा मंडल अत्यंत सुशोभित था उस दिन चतुर्दशी और मंगलवार था एवं पंच मकार से सेवित देवी ने उस दिन अर्धरात्रि में उस गहरे पीले हरिद्रा सरोवर में निवास किया और उस रात्रि का नाम वीर रात्रि पड़ा तभी से चतुर्दशी मंगलवार के दिन तांत्रिक गण पंच मकार का सेवन करते हैं श्रीविद्या जनित तेज से दूसरी त्रैलोक्‍य स्तंभनी ब्रह्मास्त्र विद्या उत्पन्न हुई उस ब्रह्मास्त्र का तेज विष्णु से उत्पन्न तेज में विलीन हो गया और वह तेज विद्या और अनुविद्या में लीन हुआ । माँ बगलामुखी को पीताम्बरा भी कहाँ जाता है । देवी के दश महाविद्या स्वरूपो मे आठवां स्वरूप माँ बगलामुखी देवी का है । माँ बगलामुखी देवी को स्तम्भन शक्ति की देवी भी कहाँ जाता है । 


माँ बगलामुखी की उपासना मे सबसे महत्वपूर्ण है की माँ की उपासना रात्री के समय 9से 12 के बीच पीले वस्त्र पहनकर ही करना चाहिए । माँ की उपासना के लिए एक चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाए ,फिर सामने अखण्ड दीपक जलाए , उन्हे पीले फूल और नेवेद्य अर्पित करें । 


सबसे पहले इनके भैरव मृत्युंजय रूप की उपासना करें । 

इसलिए साधना के पूर्व महामृत्युंजय मंत्र की एक माला जप अवश्य करना चाहिए। साधना उत्तर की ओर मुंह करके करनी चाहिए। फिर बगलामुखी कवच का पाठ करें । इसके बाद संकल्प के साथ माँ के मंत्र का जाप करें । 

माँ का मंत्र 

ॐ ह्लीं बगलामुखी देवी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वाम कीलय बुद्धि विनाशाय ह्लीं ॐ फट् स्वाहा l


मंत्र का कम से कम 36 हजार या एक लाख जाप करें । 

इसके बाद दशांक हवन करें । माँ बगलामुखी तंत्र की देवी है । इनमे ब्रम्हान्ड की शक्ति का समावेश है । माँ बगलामुखी की पुजा हर बाँधा से मुक्ति दिलाती है । इसलिए माँ की भक्ति करने वाले साधक के जीवन मे खुशियो ही खुशियों का आगमन होता है । 

लेकिन माँ बगलामुखी उपासना के नियम जानना बहुत ही अनिवार्य है जो इस प्रकार है ..

1 माँ बगलामुखी की उपासना बिना गुरू के निर्देश की कदापि नही करना चाहिए । 

2 आराधना खुले आसमान के नीचे नही करनी चाहिए । 

3 आराधना के समय ब्रम्हचर्य का पालन बहुत जरूरी है । 

4 देवी पूजा किसी के विनाश के लिए नही करनी चाहिए 


इन सभी नियमों का पालन आपको करना बहुत जरूरी है । 

और दक्षिणा लेकर संकल्प लें । 


आप माँ बगलामुखी अनुष्ठान द्वारा सम्पूर्ण समस्याओ का समाधान कर सकते है , अगर आपको कोई माँ बगलामुखी का अनुष्ठान करना है तो आप हमें अवश्य बताए । 

आपको माँ बगलामुखी माँ की उपासना के बारे मे किसी प्रकार की जानकारी चाहिए या आपको माँ बगलामुखी साधिका देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामीजी से किसी प्रकार की जानकारी चाहिए तो वीडियो पर कॉमेंट्स कर अपनी बात रखे । 


रविवार, 12 जुलाई 2020

धारूल की माँ अम्बादेवी दर्शन 12 जुलाई 2020 ( श्री सन्दीप साकरे जी )






माँ अम्बा देवी शक्तिपीठ की दर्शन यात्रा में खड़ी पहाड़ी को चढ़कर जाना पड़ता हैं जिसके ऊपर नागदेवता , माँ काली और हनुमान प्रतिमा कें दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता हैं ।










ये वह स्थान हैं जहाँ तपस्वी सन्त मंगला माँ ने माँ अम्बे की साधना की थी ....यही सामने माँ मंगला देवी की समाधि विराजमान हैं और भगवान गणेश जी की प्रतिमा गुफा कें प्रवेश द्वार पर विराजमान हैं ।
जहाँ पर माँ मंगला देवी तपस्विनी की तस्वीर रखी हुई हैं वहां माँ मंगला बैठी रहती थी , अम्बा देवी की यात्रा बड़ी मनोरम हैं आईए आगे चलते हैं ।...






माँ अम्बा देवी शक्तिपीठ में श्रध्दालु भक्त आते हि नीचे नदी में बहते पानी से स्नान करते हैं , यह पानी गुप्त गुफा से आ रहा हैं , स्वयं माँ अम्बे और भगवान शिव कें चरणो से ...अम्बा देवी शक्तिपीठ की दिव्य गुफा का मार्ग बन्द किया गया हैं जिसे ऋषि मुनि आश्रम कहते हैं ...यह पानी आदि गंगा का पावन चल वही से आ रहा हैं ...





माँ अम्बा देवी की स्वयं भू प्रकट हुई प्रतिमा ....माँ अम्बे उनसे दरबार आने की ईच्छा रखने वालें हर एक भक्त की रास्ता देख रही हैं ..यह अति पावन भूमि हैं यहां आज भी लाखो वर्षों से जप कर रहे ऋषि मुनि साधना कर रहे हैं ...
माँ अम्बा कें बारे में विशेष कहानी प्रचलित हैं की जब तक माँ अम्बा स्वप्न में बुलावा ना भेजे कोई भक्त नही आता दर्शन को ..




आदि शक्ति माँ अम्बे का दरबार हर किसी भक्त कें लिए खुला हैं जो माँ का अनन्य भक्त हैं ...
जो माँ अम्बे की अनन्य भक्ति करते हैं उनके जुबानी माँ अम्बा कें चमत्कारो की अनगिनत कहानी आप सुन सकते हॊ



माँ अम्बा कें दरबार हजारो भक्त आते हैं दर्शन करके चले जाते हैं ...लेकिन माँ अम्बे का अनन्य भक्त तो हजारो में कोई एक हि आता हैं जो सिर्फ माँ से मिलने आता हैं , माँ कें दर्शन को आता हैं इनमे एक माँ रेणुका देवी कें अनन्य भक्त सन्दीप साकरे जी हैं ....



ऐसी अम्बा देवी शक्तिपीठ में सैकड़ो गुफाएँ हैं जिनमे एक गुफा माँ कामाख्या कें धाम जाती हैं लेकिन वहां कोई भी भक्त नही जा सकता ....





माँ अम्बारानी धारूल माता कें शक्तिपीठ में गुप्त गुफाओं से जुड़े हजारो रहस्य हैं जिनकी खोज माँ अम्बा भक्त रविन्द्र कर रहा हैं , तपस्वी सन्त मंगला माँ ने इन्ही गुफाओं से होकर कई तीर्थों की यात्रा की हैं , ये वही गुफाएं हैं जहाँ कभी इन्द्र आदि देवताओ ने माँ अम्बा की तपस्या की थी ....
यहाँ की गुफाओं को देखकर बड़े हि अलौकिक सुख की प्राप्ति होती हैं 


माँ अम्बादेवी धाम में विराजे भगवान शिव का पावन धाम ...माँ अम्बा रानी कें दर्शन कें बाद श्रध्दालु भोलानाथ कें दर्शन करते हैं फिर महाकाली माँ कें दर्शन की ओर आगे बढ़ते हैं 




भगवान की महिमा गाते छोटे बच्चे भी नही थकते ...
माँ अम्बा देवी दर्शन कें लिए निरंतर हि स्कूल कें बच्चे यहां पिकनिक मनाने आते हैं , यहां खाना बनाने कें लिए उत्तम व्यवस्था भी हैं इसलिए यहाँ कें प्राकृतिक दृश्य का आनंद लेनें पहुंचते हैं  


जो जैसी भावना लेकर आता हैं माँ अम्बा उसे वैसा हि फल देती हैं , यहाँ साक्षात माँ अम्बे विराजमान हैं , शक्तिपीठों में माँ अम्बा जी का बड़ा महत्व हैं क्यो यहां पर माँ सती का हृदय गिरा था , माँ अम्बा बड़ी दयालु हैं , जिस भक्त पर माँ अपना हाथ रख दे , उनके जीवन में चार चांद लग जाते हैं ....


माँ अम्बा देवी में जब भी कोई सच्चा भक्त दर्शन को आता हैं तो वह अपने परिवार कें साथ आता हैं या फिर माँ अम्बे कें अनन्य नये भक्तों को दर्शन कराने आता हैं ...
सन्दीप साकरे जी धामनगांव कें रहने वालें जो माँ भगवती दुर्गा कें अनन्य भक्त हैं ...











माँ कालिका और माँ अन्नपूर्णा दरबार कें प्रवेश मार्ग का रास्ता





ये माँ अन्नपूर्णा का मन्दिर हैं , जो भक्त माँ अम्बा देवी दर्शन कें साथ माँ अन्नपूर्णा कें दर्शन करता हैं उसके घर अन्न कें भंडार भरे रहते हैं । माँ अन्नपूर्णा की बड़ी कृपा होती हैं



आप को माँ अम्बे दर्शन की यह फोटो कैसे लगी कॉमेंट्स करके अवश्य बताए